Indian Telecommunication Bill, 2022(सरकार के अंदर में होगी व्हाट्सएप और टेलीग्राम) Telecom Regulatory Authority of India और Over-The-Top भी दायरे में

 

Indian Telecommunication Bill, 2022(सरकार के अंदर में होगी व्हाट्सएप और टेलीग्राम) Telecom Regulatory Authority of India और Over-The-Top  भी दायरे  में 

1 खबर                                                         
Indian Telecommunication Bill- 2022


2 आवश्यकता

3 प्रावधान
4 आलोचना
 निष्कर्ष                                   


1 खबर  :-

टेलीकम्युनिकेशन मिनिस्टर श्री अश्विनी वैष्णव ने टेलीकम्युनिकेशन बिल 2022 का ड्राफ्ट लॉन्च किया लोगो के सुझाव के लिए

2 आवश्यकता :-

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो  भारत में  तकरीबन एक करोड़ दूरसंचार ग्राहक मौजूद है  और यही वजह है कि भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क  है  यही  वजह  है की  भारत में 4 मिलियन से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान करता है और साथ ही भारत का दूरसंचार क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 8%  से ज्यादा योगदान देता है लेकिन इतने महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी  इस पूरे क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित जो कानून है वह  कानून काफी ज्यादा पुराने हैं 

1 भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 
2 भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम 1933 और 
3 टेलीग्राफ वायर गैर कानूनी संरक्षण अधिनियम 1950  

यह जो कानून है कि काफी ज्यादा पुराने हैं वर्तमान  समय में भारत में 4G मौजूद है वही 5G का परीक्षण किया जा रहा है इसके अलावा भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स की जो  तकनीक है वह भी मौजूद है | रिसर्च एंड डेवलपमेंट , कंप्यूटिंग जैसी नई-नई तकनीकों पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है तो ऐसे में जो किया जा रहा  है यह भारत के आर्थिक विकास में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं | भारत में नए नए अवसर बढ़ेंगे| तो  एक ऐसे कानून की जरूरत है जो बदलती परिस्थितियों को स्वयं में समावेशित कर सके जो तकनीक लगातार तेजी से बदल रही है उस बदलती तकनीक को अपने अंदर शामिल कर सके  इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा हाल ही में भारतीय दूरसंचार विल 2022 के ड्राफ्ट को पेश किया गया है 

 3 प्रावधान :-

over-the-top को  संचार सेवाओं में  शामिल करने की बात की गई है | यह एंड टो एंड इंक्रिप्शन के बेस पर भी काम करती है  पहले प्रावधानों की बात करते हैं तो इस विधेयक में एक भी प्रावधान किया गया है  जिस तरह से अन्य दूरसंचार ऑपरेटर  भारत में लाइसेंस लेते है उसी तरह इसे भी कवर किया जायेगा | 

इसके अलावा इस पूरे विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने के लिए या फिर भारत में सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए  सरकार को जरूरत पड़ती है तो सरकार किसी की सूचना ले सकते है, पढ़ सकती है | जो कि काफी विवादास्पद प्रावधान है 

इसके अलावा TRAI की शक्तियों में बदलाव करने की कोशिश की गई है यानि शक्तियों को कुछ हद तक सीमित करने की कोशिश की गई है | जिस अधिनियम के माध्यम से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण को गठित किया गया था इस अधिनियम में प्रावधान किया गया था कि भारत का जो दूरसंचार विभाग है यदि दूरसंचार विभाग किसी भी एंटिटी को लाइसेंस देता है तो लाइसेंस देने से पहले ट्राई से सलाह लेना जरूरी है | यदि सलाह नहीं लेता है तो लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है लेकिन अब  सलाह लेने का प्रावधान  को समाप्त कर दिया गया है 

इसके अलावा ट्राई अधिनियम में यह भी प्रावधान था | यदि ट्राई अपनी कोई सिफारिश देता है सरकार को इस तरह की सिफारिश देने से पहले ट्राई सरकार से  कुछ दस्तावेज मांग सकता है इस  विधेयक में इस प्रावधान को भी समाप्त कर दिया गया है  

यह भी प्रावधान था कि केवल वही अधिकारी ट्राई के सचिव बन सकते हैं जो सरकार में केंद्र सरकार ने या तो सचिव रहे हो या फिर अतिरिक्त सचिव रहे हो लेकिन अब इस प्रावधान को भी समाप्त कर दिया अब ट्राई के सचिव , केंद्र सरकार में सचिव भी आर्थिक सचिव के नीचे वाली लाइन के अधिकारी भी ट्राई के सचिव के तौर पर नियुक्त किए जा सकते हैं

प्रावधान किया गया कि यदि कोई स्पेक्ट्रम रखने वाली दूरसंचार इकाई दिवालिया घोषित कर दी जाती है तो उस कंपनी के पास जो स्पेक्ट्रम मौजूद होंगे वह स्पेक्ट्रम सरकार के नियंत्रण में आ जाएंगे  इससे पहले स्पष्ट नहीं था |

इसके अलावा यूनिवर्सल  सर्विस ऑब्लिगेशन फण्ड(USOF) को  नई   टेली कम्युनिकेशन डेवलपमेंट फण्ड(TDF) से रिप्लेस कर दिया गया है | यह जो यूनिवर्सल  सर्विस ऑब्लिगेशन फण्ड(USOF) था इस फंड को दूरसंचार कंपनियों के एडजेस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू  का 5 % से वित्त पोषित किया जाता था और इस फंड का उपयोग मुख्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर उपयोग किया जाता था |टेली कम्युनिकेशन डेवलपमेंट फण्ड(TDF) का वित्तपोषण इसी प्रोसेस के माध्यम से की जाएगी लेकिन इस फंड का उपयोग मुख्य तौर पर शहरी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने या फिर उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा जो अभी तक कोई भी दूरसंचार नेटवर्क मौजूद नहीं है इसका उपयोग भारत में दूरसंचार क्षेत्र से संबंधित अनुसंधान और विकास रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगाइसके अलावा इसके माध्यम से कौशल विकास पर भी जोड़ दिया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क बेंच मार्क तक ले जाया जा सके |


 4 आलोचना :-

इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि सरकार देश के हित में लगता है कि किसी कॉल को ट्रेस , इंटरसेप्ट किया जाना जरूरी है तो सरकार ऐसा कर सकती है लेकिन इस पूरे विषय को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है इसके माध्यम से लोगों की निजता के अधिकार का हनन होगा |

कानून के माध्यम से सरकार द्वारा विपक्षी दलों ,

सामाजिक कार्यकर्ताओं को टारगेट करने की कोशिश की जा सकती है उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा सकती है यदि ऐसा किया जाता है तो यह भारत के लोकतंत्र को कमजोर कर देगा | इस विधेयक के माध्यम से नियामक प्राधिकरण के तौर पर TRAI की शक्तियों को काफी ज्यादा सीमित करने की कोशिश की जा रही है ,इसके माध्यम से सरकार द्वारा शक्तियों का केंद्रीकरण किया जा रहा है | सारी शक्तियां सरकार के पास ही सीमित की जा रही है | इससे ट्राई की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा आगे चलकर एक समग्र तौर पर भारत के लोकतंत्र को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है तो इसकी आलोचना की जा रही है |

 निष्कर्ष  :-   

कह सकते हैं कि जो  नई प्रौद्योगिकि को कवर करने की कोशिश करता है आगे चलकर  विकास पर भी जोड़ देगा | इस विधेयक के माध्यम से स्पेक्ट्रम प्रबंधन को लेकर पहले जो अस्पष्टता मौजूद थी उसको कम करने की कोशिश की गई है इसके अलावा कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और अनुसंधान पर जोर देने की भी बात की गई है |  भविष्य के लिहाज से काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है |


मुझे उम्मीद है कि इस ब्लॉग के माध्यम से जिन बिंदुओं पर चर्चा की गई है वह आपको समझ में आया हो धन्यवाद  
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