क्या कार्बन डेटिंग से सुलझेगी ज्ञानवापी मामला ?what is Gyanvapi case ?

क्या कार्बन डेटिंग से सुलझेगी ज्ञानवापी मामला ? what is Gyanvapi case ?

क्या कार्बन डेटिंग से सुलझेगी ज्ञानवापी मामला ? what is Gyanvapi case ?
Gyanwapi and Kashi Temple

1 न्यूज़ में क्या है ?
इसकी रुपरेखा क्या है 
क्या है कार्बन डेटिंग  ?
परिनाम


1 न्यूज़ में क्या है

वाराणसी की स्थानीय अदालत में याचिका दायर की गई है जिसमें शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग की गई है ताकि  पता लगाया जा सके 


इसकी रुपरेखा क्या है 

कोई वस्तु कितनी पुरानी है तो आप क्या करेंगे जाहिर तौर पर आप किसी ऐसे व्यक्ति से पूछेंगे जो आपको इस संबंध में जानकारी दे सके लेकिन तब क्या होगा जब वह वस्तु काफी ज्यादा पुरानी हो ,इसके लिए हम  विज्ञान का सहारा लेते हैं |

ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच विवाद लगातार जारी है काफी लंबे समय से यह दावा किया जा रहा है कि जो मस्जिद है यह पहले एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी जिसकी वजह से उनकी मांग है कि इस मस्जिद को हिंदू मंदिर के अधीन कर दिया जाए | मुस्लिम पक्ष स्पष्ट तौर पर दावे का विरोध कर रहा है | इसके बाद अदालत ने इसी वर्ष मई महीने में मस्जिद की वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था |मस्जिद के बजूखाने से एक पत्थर से बना  स्ट्रक्चर  मिला जिसके हिन्दू पक्ष शिवलिंग बता रहा है वही मुस्लिम पक्ष इसे फुआरा बता रहा है |


यदि इतिहास का कालक्रम हमारे पास मौजूद नहीं होगा , तो  इतिहास का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाएगा | प्राचीन काल का अध्ययन करने के लिए हमारे पास दो तरह की विधियां मौजूद है 

1 रिलेटिव डेटिंग मेथड और  
2 Absolut डेटिंग मेथड 

1 रिलेटिव डेटिंग मेथड

रिलेटिव मेथड है इसके तहत मुख्य तौर पर अतीत की घटनाओं के सापेक्ष में किसी जीवाश्म की आयु का पता लगाने की कोशिश की जाती है उसके कंपैरिजन में पता लगाने की कोशिश की जाती है उदाहरण के लिए यदि हमें कोई मिलता है तो उस मेथड के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इतिहास की किस घटना के आसपास का है 


2 Absolut डेटिंग मेथड 

इसके तहत मुख्य तौर पर किसी भी जीवाश्म की आयु स्थिति थी ज्ञात करने की कोशिश की जाती हैऔर इसी मेथड के हिस्से के तौर पर हमें बात करेंगे

कार्बन डेटिंग

जो कार्बन डेटिंग मेथड है यह व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है किसी भी किसी भी एलिमेंट कि किसी भी जीवाश्म की तिथि निर्धारित करने के लिए किसी भी फॉसिल की तिथि निर्धारित करने के लिए पूरी मेथड के तहत कार्बनिक पदार्थों की स्पष्ट आयु पता लगाने की कोशिश की जाती है कार्बनिक पदार्थ जो जीवित चीजें होती है उन सभी चीजों में विभिन्न रूपों में अलग-अलग रूपों में किसी न किसी तरह से कार्बन जरूर मौजूद होता है जिसकी वजह से इसे कार्बन डेटिंग मेथड भी कहा जाता है इस पूरे मेथड के तहत तिथि निर्धारित करने के लिए कार्बन की एक विशेष समस्थानिक यानी आइसोटोप जिसे C14  नाम से जाना जाता है इसका उपयोग किया जाता है  और इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मानकों से की जाती है जिसके माध्यम से किसी जीवाश्म की तिथि उसकी डेटिंग करने की कोशिश की जाती है 

हम जानते हैं कि हर एक परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन एक साथ मौजूद होते हैं एक ही जगह पर मौजूद होते हैं अब एक ही रासायनिक तत्वों में  अलग-अलग हो सकते हैं | एक ही तत्व के परमाणु में जिन में अलग-अलग न्यूट्रॉन मौजूद हैं जिनमें न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग है इन्हीं को समस्थानिक कहा जाता है | हम जानते हैं कि कार्बन के मुख्यतः तीन समस्थानिक मौजूद है कार्बन 12 , कार्बन 13 , कार्बन 14 | कार्बन-12  के नाभिक में  6 प्रोटॉन और 6 न्यूटन मौजूद होते हैं कार्बन-13  के न्यूक्लियस में 6 प्रोटॉन और 7 न्यूट्रॉन मौजूद होते हैं जबकि कार्बन 14  के न्यूक्लियस में  छह प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन मौजूद होते हैं | अब यहां विशेष बात यह है कि उनके अलग-अलग गुण भी होते हैं क्या निकले प्रॉपर्टीज भी होती है कि शुरुआती कार्बन 12 , कार्बन 13 ,दोनों स्स्थिर होते हैं जबकि जो कार्बन 14 है वह अस्थिर  होता है| इसके अलावा carbon-14 रेडियोधर्मी पदार्थ भी होता है , रेडियोएक्टिव एलिमेंट भी होता है | कार्बन डेटिंग यही से उत्पन्न होता है |


वायुमंडल में कॉस्मिक किरणें किसी परमाणु से टकराती है तो इसके वजह से एक न्यूट्रॉन उत्पन्न होता है कि न्यूट्रॉन पैदा जो काफी ज्यादा शक्तिशाली होता है  आगे चलकर जब ये न्यूट्रॉन हमारे वायुमंडल में किसी नाइट्रोजन प्रोटोन से टकराता है,  जिनकी वजह से कार्बन 14 उत्पन्न  होता है वायुमंडल में चलकर ऑक्सीजन के साथ संयोग कर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है इस कार्बन डाइऑक्साइड को हमारे पेड़ पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है  तो यह पेड़ पौधे जानवरों द्वारा खाए जाते हैं और साथ ही मनुष्य द्वारा भी खाए जाते हैं जिससे एक कार्बन सर्किल बन जाता है 


 परिनाम

1 40000 - 60000 वर्ष से ज्यादा है तो  इस पूरे मेथड का उपयोग नहीं किया जा सकता है |
2  कार्बन की उपस्थिति न होने परकार्बन की गणना भी नहीं की जा सकती है |

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